प्रकाश संश्लेषण
ऑक्सीजन (Oxygen) को ‘‘अपशिष्ट उत्पाद’’ कहा गया है। क्या यह सही है?
मूल रूप से, प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश अभिक्रियाओं का अपशिष्ट उत्पाद ऑक्सीजन होती है। यह प्रक्रम के आवश्यक भाग से बचा हुआ “अवशेष” है। जीवन के अधिकांश रूपों को बनाए रखने के लिए जितनी ऑक्सीजन चाहिए, वह इसी प्रक्रम के दौरान बनती है।
प्रकाश संश्लेषण क्या है?
कोई पौधा भूखा होने पर भोजन खरीदने के लिए रेस्टोरेंट नहीं जा सकता। तो पौधा अपने जीवित रहने के लिए आवश्यक पोषण कैसे प्राप्त करता है? प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रम है जिसमें पौधे सूर्य की ऊर्जा (Energy), कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon dioxide) और जल (Water) से अपना “भोजन” बनाते हैं।
लगभग सभी जीव अपने लिए ऊर्जा पौधों से प्राप्त करते हैं जो प्रकाश संश्लेषण करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक पक्षी कैटरपिलर खाता है, तो उसे वही ऊर्जा मिलती है जो कैटरपिलर को पौधों से मिलती है। अर्थात, पक्षी को अप्रत्यक्ष रूप से वही ऊर्जा मिलती है जिसका आरंभ प्रकाश संश्लेषण से बने “भोजन” से होता है। इसलिए, प्रकाश संश्लेषण का प्रक्रम पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रकाश संश्लेषण मुख्यतः पत्ती में होता है, परंतु यह पौधे के अन्य हरे भागों, जैसे हरे तने और शाखाओं में भी हो सकता है। जल और अन्य पोषक तत्व जड़ों से पत्तियों तक नलिकाओं के समान चलने वाली वाहिकाएँ (Vessels) ले जाती हैं। प्रकाश संश्लेषण के दौरान, कार्बन डाइऑक्साइड और जल सूर्य ऊर्जा के साथ मिलकर ग्लूकोज़ (Glucose) और ऑक्सीजन बनाते हैं, जैसा कि ऊपर दिए गए चित्र में दिखाया गया है। ग्लूकोज़ एक शर्करा है जो पौधों के “भोजन” का स्रोत होती है। पशु जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन, प्रकाश संश्लेषण का अपशिष्ट है।
प्रकाश संश्लेषण का प्रक्रम
प्रकाश संश्लेषण हरित लवक (Chloroplast) में होता है। हरित लवक पौधों की कोशिकाएँ (Cells) में पाए जाते हैं, सामान्यतः पशु कोशिकाओं में नहीं। पौधे अत्यंत सूक्ष्म कोशिकाओं से बने होते हैं जिन्हें सूक्ष्मदर्शी (Microscope) से देखा जा सकता है। एक कोशिका झिल्ली (Membrane) पौध कोशिका को घेरती है और उसके भीतर नाभिक (Nucleus) तथा अन्य झिल्ली-बद्ध अंगक (Organelles) जैसे हरित लवक होते हैं। हरित लवक में पर्णहरित (Chlorophyll) नामक हरा वर्णक (Pigment) होता है, जो पत्तियों में सूर्य से ऊर्जा ग्रहण करता है। हरित लवक पौधे के हरे तनों और शाखाओं में भी हो सकते हैं। हरित लवक के दो अलग-अलग भाग होते हैं, जैसा कि नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है।
- समतल थैलियाँ, अथवा थायलाकोइड (Thylakoid), से बने आंतरिक कोष्ठक को थायलाकोइड रिक्त स्थान (Thylakoid space) कहते हैं। थायलाकोइड की झिल्ली में स्थित पर्णहरित सूर्य के प्रकाश (Sunlight) से ऊर्जा को अवशोषित करता है।
- थायलाकोइड को घेरने वाला अभ्यंतर रिक्त स्थान एक तरल से भरा होता है जिसे स्ट्रोमा (Stroma) कहते हैं। यहीं कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर ग्लूकोज़ बनता है। स्टोमेटा (Stomata) सूक्ष्मदर्शीय (Microscopic) बारीक रन्ध्र होते हैं जिनके चारों ओर गुर्दे के आकार की दो संरक्षक कोशिकाएँ (Guard cells) होती हैं। संरक्षक कोशिकाएँ स्टोमेटा के खुलने-बंद होने में सहायता करती हैं ताकि गैसों का विनिमय (Gas exchange) हो सके। वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड पत्ती में विशेष छिद्रों, स्टोमेटा, के माध्यम से प्रवेश करती है, जैसा कि नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है।
प्रकाश संश्लेषण के अभिकारक (Reactants) कार्बन डाइऑक्साइड, जल और सूर्य से प्राप्त ऊर्जा हैं। अर्थात, प्रकाश संश्लेषण की रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए कार्बन डाइऑक्साइड, जल और सूर्य की ऊर्जा आवश्यक हैं। चूँकि भोजन का संश्लेषण (Synthesis) सूर्य के प्रकाश में होता है, इसलिए इस प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं, जहाँ “फोटो” का अर्थ प्रकाश और “संश्लेषण” का अर्थ मिलाना है। प्रकाश संश्लेषण का समग्र रासायनिक वर्णन यह है कि छह अणु (Molecule) कार्बन डाइऑक्साइड और छह अणु जल, सौर ऊर्जा की उपस्थिति में, अभिक्रिया करके एक अणु ग्लूकोज़ और छह अणु ऑक्सीजन बनाते हैं। रासायनिक संकेत (Chemical symbols) का उपयोग करते हुए, यह समीकरण (equation) इस प्रकार लिखा जाता है:
@$\begin{align*}\text{कार्बन डाइऑक्साइड} + \text{जल} \xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश}} \text{ग्लूकोज़} + \text{ऑक्सीजन}\end{align*}@$
@$\begin{align*}6\text{CO}_2 + 6\text{H}_2{O} \xrightarrow{\text{sunlight}} \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 6\text{O}_2\end{align*}@$
प्रकाश संश्लेषण में बनी अतिरिक्त ग्लूकोज़ स्टार्च में बदलकर पौधे में आरक्षित भोजन के रूप में संचित हो जाती है। स्टार्च की उपस्थिति को आयोडीन परीक्षण (Iodine test) से जाँचा जा सकता है। इस प्रयोग (experiment) में एक पत्ती को पहले उबलते जल में डुबोया जाता है। इससे कोशिका झिल्ली बाधित होती है और कोशिका भित्ति (Cell wall) मुलायम हो जाती है, जिससे आयोडीन विलयन (solution) कोशिकाओं में प्रवेश कर अभिक्रिया कर सके। इसके बाद पत्ती को अल्कोहल (Alcohol) में रखकर उबलते जल की सहायता से गर्म किया जाता है। पर्णहरित अल्कोहल में घुल जाता है जिससे अल्कोहल हरा हो जाता है। पत्ती से पर्णहरित हटाने पर आयोडीन से होने वाला रंग परिवर्तन स्पष्ट दिखता है। फीकी (ब्लीच) हुई पत्ती पर आयोडीन विलयन डालें। आयोडीन का रंग नीला-काला अथवा बैंगनी हो जाता है, जो पत्ती में स्टार्च की उपस्थिति दर्शाता है, क्योंकि आयोडीन स्टार्च के साथ यौगिक बनाकर अपने भूरे रंग को नीला-काला/बैंगनी कर देता है। पत्ती पर यह रंग प्रायः गहरा हरा दिखाई देता है। नीचे दिए गए वीडियो में आयोडीन परीक्षण देखें।
हरे रंग के अलावा, पत्तियाँ लाल या नारंगी रंग की भी हो सकती हैं। क्या हरे रंग के अलावा अन्य रंगों की पत्तियों में भी प्रकाश संश्लेषण होता है? लाल या नारंगी पत्तियों में भी हरा वर्णक पर्णहरित होता है; परंतु लाल/नारंगी वर्णक हरे वर्णक को ढक देते हैं। इसलिए, ऐसी पत्तियों में भी प्रकाश संश्लेषण होता है।
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| सारांश |
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पुनरावलोकन
- संरक्षक कोशिकाओं का क्या कार्य है?
- प्रकाश संश्लेषण से बनने वाले दो उत्पाद कौन से हैं?
- प्रकाश संश्लेषण करने के लिए पौधों को किन दो कच्चे पदार्थों की आवश्यकता होती है?
- शैवाल हरे रंग के क्यों होते हैं?
| Image | Reference | Attributions |
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